”डबल इंजन की सरकार में जशपुर की ‘विकास वाली बोगी’ ही गायब; मुख्यमंत्री के गृह जिले के साथ हुआ विश्वासघात?” — यू.डी. मिंज
केंद्रीय बजट 2026 में जिले की उम्मीदों पर फिरा पानी, रेल और विकास के मुद्दे ठंडे बस्ते में
कुनकुरी/जशपुर – केंद्रीय बजट 2026 के पिटारे से जशपुर के लिए केवल निराशा निकली है। पूर्व विधायक और जिला कांग्रेस अध्यक्ष यू.डी. मिंज ने बजट को जिले के भविष्य के साथ ‘खिलवाड़’ करार देते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि विकास की जिस गाड़ी को पटरी पर होना चाहिए था, उसे सरकार की अदूरदर्शिता ने फिर से जंजीरों में जकड़ दिया है।
सत्ता के ‘दिग्गजों’ की चुप्पी पर बड़ा प्रहार
यू.डी. मिंज ने जशपुर के वर्तमान नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्या ऐसे ही विकसित जशपुर होगा? यह जिले का दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया और राज्यसभा सांसदों की मौजूदगी के बावजूद जशपुर की झोली खाली रही। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा— “जब जिले के पास इतना बड़ा नेतृत्व है, तो फिर जशपुर की आवाज़ दिल्ली के गलियारों में क्यों नहीं गूंजी? यह कमजोर और दिशाहीन नेतृत्व का जीता-जागता प्रमाण है।”
‘रेल’ का सपना फिर हुआ धुंआ-धुंआ
मिंज ने कहा कि जशपुर की दशकों पुरानी मांग सीधी रेल कनेक्टिविटी को एक बार फिर नजरअंदाज कर दिया गया। लोहरदगा-कोरबा और झारसुगुड़ा-अंबिकापुर रेल मार्ग के लिए बजट में कोई प्रावधान न होना यह दर्शाता है कि जशपुर को केवल वोट बैंक समझा गया है, विकास का हकदार नहीं।
पर्यटन और कृषि: उपेक्षा की पराकाष्ठा
जशपुर जिसे ‘छत्तीसगढ़ का स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है, उसे राष्ट्रीय पर्यटन सर्किट में जगह न मिलना जिले के साथ घोर अन्याय है। मिंज ने कहा कि एग्रो हब का अभाव है यहाँ काजू, चाय, टमाटर और मिर्च के लिए ‘एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन’ या वैल्यू एडिशन प्लांट की कोई घोषणा नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि इको-टूरिज्म को केंद्र ने डबल इंजन कि सरकार कहकर झटका दे दिया जशपुर जिले में दनपुरी, राजपुरी और खुड़िया रानी जैसे स्थलों के लिए कोई विशेष फंड नहीं मिला।
पासपोर्ट सेवा केंद्रकी इस बुनियादी मांग को भी फिर से अनसुना कर दिया गया। जिससे हवाई यात्रा करने की चाह रखने वाले को मायूसी मिली
उन्होंने कहा कि मनरेगा के बजट में कटौती को मिंज ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि जशपुर जैसे आदिवासी बहुल जिले में, जहाँ मजदूर मनरेगा पर निर्भर हैं, वहां बजट कम करना मजदूरों के पेट पर लात मारने जैसा है।
यू. डी. मिंज ने कहा कि “जशपुर की दुर्लभ जैव विविधता के लिए रिसर्च सेंटर की मांग खारिज करना यह साबित करता है कि सरकार को इस अंचल की पर्यावरणीय विरासत से कोई सरोकार नहीं है। महिला छात्रावास स्वागत योग्य हैं, लेकिन रेल और उद्योग के बिना जशपुर का युवा पलायन करने को मजबूर ही रहेगा।”
यू.डी. मिंज ने कहा कि जशपुर की जनता इस उपेक्षा को भूलेगी नहीं। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जशपुर को ‘हवा’ में छोड़ देना जशपुर की जनता के छल है धोखा है.
















