
फरसाबहार: एक ओर जहाँ सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य की नींव मजबूत करने के लिए लाखों-करोड़ रुपये खर्च कर रही है, वहीं फरसाबहार जनपद पंचायत में जिम्मेदारों की लापरवाही ने शासन की योजनाओं को पलीता लगा दिया है। मनरेगा और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से स्वीकृत ग्राम पंचायत सागजोर आंगनबाड़ी भवन का निर्माण एक वर्ष बीत जाने के बाद भी अधूरा पड़ा है, जिसके चलते क्षेत्र के मासूम बच्चे किसी सुरक्षित परिसर के बजाय किराए के जर्जर और ‘कबाड़’ जैसे मकान में बैठने को मजबूर हैं।
निर्माण कार्य में बरती गई घोर लापरवाही और उदासीनता का संज्ञान लेते हुए जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासन ने संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव और ग्राम रोजगार सहायक को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।’

नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि:
वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत भवन निर्माण कार्य का एक वर्ष पूर्ण होने के बावजूद कार्य अपूर्ण है।
निर्माण की निगरानी और पर्यवेक्षण में बरती गई लापरवाही शासकीय सेवा आचरण नियमों का सीधा उल्लंघन है।
इसे विभागीय निर्देशों के प्रति घोर अनुशासनहीनता माना गया है।
प्रशासन ने सचिव और रोजगार सहायक को चेतावनी दी है कि वे नोटिस प्राप्ति के तीन दिनों के भीतर अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करें। साथ ही, उन्हें निर्देशित किया गया है कि भवन निर्माण की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कार्य पूर्ण कर फोटो सहित साक्ष्य उपलब्ध कराएं। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होता है, तो संबंधितों के विरुद्ध एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सरपंच का दर्द: ठेकेदार ने बीच राह छोड़ा काम
इस पूरे प्रकरण पर जब सगजोर की सरपंच से बात की गई, तो उन्होंने व्यवस्था की बड़ी खामियों को उजागर किया। सरपंच ने बताया कि ठेकेदार ने निर्माण कार्य को बीच में ही छोड़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। सरपंच ने आश्वस्त किया है कि अब वे स्वयं इस निर्माण कार्य को आगे बढ़ाएंगी और इसे जल्द पूरा करने का प्रयास करेंगी ताकि बच्चों को किराए के इस असुरक्षित भवन से जल्द मुक्ति मिल सके।
*नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़*
आंगनबाड़ी केंद्र, जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास की पहली पाठशाला है, आज अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। किराए के मकान में संसाधनों के अभाव में पढ़ रहे इन नौनिहालों का भविष्य शासन और प्रशासन की फाइलों में कब तक उलझा रहेगा, यह एक बड़ा सवाल है।
प्रशासन द्वारा जारी यह नोटिस भले ही एक कार्रवाई की शुरुआत हो, लेकिन देखना यह होगा कि क्या तीन दिनों के भीतर इस भवन में रौनक लौट पाएगी या फिर ये मासूम बच्चे इसी तरह अनिश्चितताओं के बीच अपना बचपन बिताने को मजबूर रहेंगे।
















