
भक्तिमय माहौल में गणपति बप्पा को दी गई विदाई, तालाबों और नदियों में विधि-विधान से हुआ विसर्जन
फरसाबहार। गणेशोत्सव के उत्साह और भक्तिमय माहौल के बीच बुधवार की शाम करीब 4 बजे से क्षेत्र में भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हो गया। विभिन्न गांवों और चौक-चौराहों पर स्थापित गणेश प्रतिमाओं को गणेश उत्सव समितियों और श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा एवं उत्साह के साथ विसर्जन स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान जगह-जगह डीजे की धुन, ढोल-नगाड़ों और “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा।
फरसाबहार विकासखंड के ग्राम कोरंगामाल के भालूमुंडा यादव पारा में भी गणेश प्रतिमा की विसर्जन यात्रा निकाली गई। श्रद्धालु प्रतिमा को लेकर कोकिया नदी तक पहुंचे। विसर्जन यात्रा के दौरान रास्तेभर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह प्रसाद का वितरण भी किया गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को प्रसाद खिलाकर गणपति बप्पा की विदाई की।
डीजे की धुन पर जमकर थिरके श्रद्धालु👉
विसर्जन यात्रा में बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए। डीजे की धुन पर युवाओं के साथ ग्रामीण महिलाएं भी जमकर थिरकती नजर आईं। कई स्थानों पर श्रद्धालु नाचते-गाते और भगवान गणेश के जयकारे लगाते हुए प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक लेकर पहुंचे। पूरे रास्ते उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से परिवार और क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कई श्रद्धालु भावुक भी नजर आए। गणपति की विदाई के दौरान लोगों ने अगले वर्ष फिर से भगवान गणेश के आगमन की कामना की।
पूजा-अर्चना और आरती के बाद हुआ विसर्जन👉
विसर्जन स्थल पर पहुंचने के बाद गणेश प्रतिमाओं की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की आरती उतारी और प्रसाद का वितरण किया। इसके बाद “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयघोष के साथ प्रतिमाओं को नदी और तालाबों में श्रद्धा के साथ विसर्जित किया गया।
गणेश उत्सव समितियों द्वारा विसर्जन यात्रा को लेकर पहले से तैयारियां की गई थीं। प्रतिमा के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण विसर्जन स्थलों पर भी काफी चहल-पहल रही। इस दौरान श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण तरीके से पूजा-अर्चना कर गणपति बप्पा को विदाई दी।
अलग-अलग अवधि तक होती है गणपति की पूजा👉
गणेश चतुर्थी के अवसर पर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा, सुविधा और स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा अलग-अलग अवधि के लिए स्थापित करते हैं। कई स्थानों पर डेढ़ दिन बाद ही गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है, जबकि कुछ जगहों पर तीन, पांच, सात अथवा दस दिनों तक भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है।
इसी क्रम में क्षेत्र के अलग-अलग गांवों और चौक-चौराहों पर स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी अलग-अलग दिनों में किया जा रहा है। प्रतिमा विसर्जन के साथ ही श्रद्धालु भगवान गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना कर रहे हैं।
भावुक माहौल में दी गई विदाई👉
गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान क्षेत्र में एक ओर जहां उत्साह और उमंग दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर भगवान गणेश की विदाई को लेकर श्रद्धालु भावुक भी नजर आए। विसर्जन के समय लगातार “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारे गूंजते रहे।
गणेशोत्सव के दौरान बने भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और आस्था के साथ गणपति बप्पा को विदाई दी। देर शाम तक अलग-अलग स्थानों से प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला जारी रहा।













