राजनीति और रिश्तों का नया अध्याय: ‘प्रशिक्षण महाअभियान’ के बहाने दिलों को जीत रहे विजय आदित्य सिंह जूदेव, ग्रामीणों ने माना अपना बेटा

राजसी वैभव छोड़ विजय आदित्य सिंह जूदेव, ग्रामीणों के बीच बिताई रातें

WhatsAppImage2026-01-25at2054531
WhatsAppImage2026-01-25at205453
WhatsAppImage2026-01-25at205454
WhatsAppImage2026-01-25at205452
WhatsAppImage2026-01-25at2054551
WhatsAppImage2026-01-25at2055231
WhatsAppImage2026-01-25at205456
WhatsAppImage2026-01-25at2053421
previous arrow
next arrow

जशपुरनगर :- भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान’ का समापन हाल ही में संपन्न हुआ, लेकिन इस अभियान ने राजनीति के पारंपरिक दायरों को तोड़कर रिश्तों की एक नई इबारत लिख दी है।

पंडरा पाठ सहित जिले के विभिन्न मंडलों में आयोजित इस बैठक के दौरान भाजयुमो जिलाध्यक्ष विजय आदित्य सिंह जूदेव का एक ऐसा रूप देखने को मिला, जिसने न केवल कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीणों को भी भावुक कर दिया।

*राजसी वैभव छोड़ ग्रामीणों के बीच बिताई रातें*

राजपरिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद विजय आदित्य सिंह जूदेव मंडल की बैठकों के लिए केवल औपचारिकता निभाने नहीं पहुँच रहे हैं। जहाँ अमूमन राजसी ठाठ-बाट की अपेक्षा की जाती है, वहाँ विजय आदित्य ने सादगी की मिसाल पेश करते हुए गाँवों की चौखट को चुना।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के उपरांत, उन्होंने किसी आलीशान व्यवस्था के बजाय ग्रामीणों के घरों में ठहरना और ज़मीन पर बैठकर उनकी समस्याएँ सुनना बेहतर समझा। उनका यह व्यवहार चर्चा का विषय बना हुआ है; वे गाँव के हर व्यक्ति को मात्र एक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि अपने परिवार का सदस्य मान रहे हैं।

*स्व. कुमार दिलीप सिंह जूदेव की यादें हुईं ताजा*

विजय आदित्य के इस आत्मीय व्यवहार ने क्षेत्र के बुजुर्गों को जशपुर के गौरव स्व. कुमार दिलीप सिंह जूदेव की याद दिला दी है। ग्रामीणों का कहना है कि “कुमार साहब” का जनता के साथ एक गहरा जुड़ाव था; वे हमेशा लोगों के सम्मान और हक के लिए उनके बीच खड़े रहते थे। आज उसी पदचिह्न पर चलते हुए उनके उत्तराधिकारी विजय आदित्य सिंह जूदेव ने यह साबित कर दिया है कि उनके लिए जनता का स्नेह ही सबसे बड़ी राजसी संपत्ति है।

*ग्रामीण बोले— “हमें अपना बेटा मिल गया”*

पंडरा पाठ के ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं के लिए यह गर्व और सौभाग्य का विषय रहा कि इतने बड़े व्यक्तित्व ने उनके बीच अत्यंत सरलता से रात्रि विश्राम किया ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा:”इतने बड़े परिवार से होने के बाद भी जब कोई हमारे बीच आकर हमारे जैसा बनकर रहता है, तो वह सीधा दिल में उतर जाता है। हमें आज अपना बेटा मिल गया है।”

*संगठन के प्रति समर्पण और सादगीपूर्ण जीवन*

भाजयुमो जिलाध्यक्ष के रूप में विजय आदित्य सिंह जूदेव पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से प्रेरित होकर संगठन को सशक्त बनाने में जुटे हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि उनका कार्यकर्ताओं के साथ सहज रूप से घुलना-मिलना उनके सादगीपूर्ण जीवन और संगठन के प्रति अटूट समर्पण को दर्शाता है।

प्रशिक्षण महाअभियान के बहाने विजय आदित्य सिंह जूदेव द्वारा स्थापित यह आत्मीय संबंध आने वाले समय में जिले की राजनीति में एक अमिट छाप छोड़ने के लिए तैयार है। यह स्पष्ट है कि उन्होंने राजनीति को केवल पद नहीं, बल्कि ‘सेवा और रिश्तों’ का माध्यम बना लिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!