फाइनल मुकाबले में 1-0 से दर्ज की शानदार जीत, मुख्य अतिथि कौशल्या साय ने खिलाड़ियों का बढ़ाया उत्साह
जशपुरनगर। ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को निखारने और युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पेटमारा-कुचमुंडा में आयोजित तीन दिवसीय नॉकआउट फुटबॉल प्रतियोगिता का उत्साहपूर्ण माहौल में भव्य समापन हुआ। प्रतियोगिता के अंतिम दिन खेले गए फाइनल मुकाबले में गोलीडीह की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जमुना की टीम को 1-0 से पराजित कर विजेता का खिताब अपने नाम कर लिया। वहीं जमुना की टीम को उपविजेता से संतोष करना पड़ा।
फाइनल मुकाबले को देखने के लिए बड़ी संख्या में खेल प्रेमी एवं ग्रामीणजन मैदान में उपस्थित रहे। मुकाबले के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने जीत के लिए पूरा दमखम लगाया। खेल के शुरुआती दौर से ही दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। खिलाड़ियों ने बेहतर तालमेल, तेज गति और शानदार खेल कौशल का परिचय दिया। दोनों ही टीमों की ओर से गोल करने के लगातार प्रयास किए गए, लेकिन अंततः गोलीडीह की टीम ने निर्णायक गोल दागकर मुकाबले में बढ़त हासिल कर ली। निर्धारित खेल के अंत तक जमुना की टीम बराबरी करने में सफल नहीं हो सकी और गोलीडीह ने 1-0 से जीत दर्ज कर प्रतियोगिता का खिताब जीत लिया।
मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं कौशल्या साय
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय शामिल हुईं। उनके आगमन से आयोजन स्थल पर खिलाड़ियों एवं खेल प्रेमियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य श्रीमती दुलारी सिंह, जिला किसान मोर्चा महामंत्री श्री कपिलेश्वर सिंह, ग्राम पंचायत के उपसरपंच श्री कैलाश अवस्थी सहित पंचगण एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या साय ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन बेहद सराहनीय है। इससे गांवों में छिपी प्रतिभाओं को अपनी क्षमता और हुनर दिखाने का अवसर मिलता है। खेल युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
खेल से विकसित होता है अनुशासन और आत्मविश्वास
श्रीमती कौशल्या साय ने अपने संबोधन में कहा कि खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास, एकजुटता, आपसी सहयोग और संघर्ष की भावना विकसित करने का सशक्त माध्यम है। खेल के मैदान में खिलाड़ी हार और जीत दोनों से सीखते हैं। इससे उनमें कठिन परिस्थितियों का सामना करने और लक्ष्य प्राप्त करने की क्षमता विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचलों में फुटबॉल जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित होने से युवाओं को अपनी खेल प्रतिभा प्रदर्शित करने का बेहतर मंच मिलता है। ऐसे आयोजन युवाओं को नशे एवं अन्य नकारात्मक गतिविधियों से दूर रखकर खेल और स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
तीन दिनों तक चले इस आयोजन में खिलाड़ियों ने पूरे उत्साह और खेल भावना के साथ हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के सफल समापन पर क्षेत्र के खेल प्रेमियों एवं ग्रामीणों में खुशी का माहौल रहा। गोलीडीह की टीम की जीत पर खिलाड़ियों और समर्थकों ने हर्ष व्यक्त किया। इस प्रतियोगिता ने एक बार फिर साबित किया कि ग्रामीण अंचलों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत है तो केवल उन्हें उचित मंच और प्रोत्साहन देने की।














