पत्रकार पिता मुकेश नायक के नवजात को शव वाहन न मिलना प्रशासन की क्रूर लापरवाही—CPR नोटिस और खंडन की राजनीति से पत्रकारों में फूटा गुस्सा, जनसम्पर्क ग्रुप से लेफ्ट हुए दर्जनों पत्रकार; कहा अब अन्याय बर्दाश्त नहीं

WhatsAppImage2026-01-25at2054531
WhatsAppImage2026-01-25at205453
WhatsAppImage2026-01-25at205454
WhatsAppImage2026-01-25at205452
WhatsAppImage2026-01-25at2054551
WhatsAppImage2026-01-25at2055231
WhatsAppImage2026-01-25at205456
WhatsAppImage2026-01-25at2053421
previous arrow
next arrow

जशपुर। जिले में प्रशासनिक अव्यवस्था और विभागों की मनमानी एक बार फिर सुर्खियों में है। पत्रकार पिता मुकेश नायक को अपने नवजात शिशु के शव को घर ले जाने के लिए शव वाहन तक उपलब्ध न होना प्रशासन की संवेदनहीनता का ऐसा उदाहरण बन गया, जिसने जशपुर की पत्रकारिता और जनता दोनों को झकझोर दिया है।

घटना के दिन मुकेश नायक ने संबंधित विभाग को बार-बार संपर्क किया, लेकिन उन्हें न सही जानकारी मिली, न वाहन। लगातार आश्वासन, टालमटोल और अनुत्तरदायित्व की स्थिति ने उन्हें और उनके परिवार को अपार मानसिक पीड़ा दी। सीमावर्ती क्षेत्र में ओडिशा प्रशासन की मदद मिली, जबकि छत्तीसगढ़ की 102 सेवा ने मदद से मना कर दिया। अंततः मजबूर होकर परिजनों को नवजात का शव स्कूटी पर रखकर घर लाना पड़ा। यह घटना न केवल अमानवीय है, बल्कि जिले की स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

इस संवेदनशील मामले को उठाए जाने के बाद विभागों की प्रतिक्रिया और भी विचलित करने वाली रही। जिम्मेदारी स्वीकारने और समस्या का समाधान ढूंढने की बजाय कई विभागों ने CPR नोटिस, कानूनी कार्रवाई और मानहानि के दावों की धमकियों का रास्ता अपना लिया। खबरों पर तुरंत खंडन जारी कर पत्रकारों को डराने का प्रयास किया गया, जैसे सच को दबाना ही समाधान हो।

इसी दमनकारी और गैर-जिम्मेदार रवैये के खिलाफ अब जिले के पत्रकार एकजुट हो गए हैं। CPR नोटिस और दबाव की इस नीति का विरोध करते हुए जिले के लगभग तीन दर्जन से अधिक पत्रकारों ने जनसम्पर्क विभाग के आधिकारिक प्रशासनिक व्हाट्सऐप ग्रुप से सामूहिक रूप से बाहर हो गए। इनमें कई वरिष्ठ, अनुभवी और जिले की बड़ी खबरों को कवर करने वाले पत्रकार शामिल हैं। पत्रकारों ने यह कदम सीधे तौर पर विभागों को संदेश देने के लिए उठाया कि वे धमकी, दबाव और नोटिस की राजनीति को अब स्वीकार नहीं करेंगे।

पत्रकारों ने कहा कि सवाल उठाना, गलतियों को उजागर करना और जनता के हित के मुद्दों को सामने लाना उनका कर्तव्य है। किसी भी विभाग की कमी को दिखाना मानहानि नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा है। यदि एक पत्रकार पिता को अपने नवजात के शव के साथ ऐसी त्रासदी झेलनी पड़ती है, तो आम जनता की स्थिति की कल्पना मात्र ही भयावह है।

पत्रकारों का आरोप है कि कुछ विभाग सच से बचने और अपनी लापरवाही के लिए जिम्मेदारी लेने के बजाय उल्टा मीडिया को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। लगातार नोटिस भेजना, खंडन जारी करना और कानूनी डर दिखाना लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने वाली प्रवृत्ति है।

पत्रकारों ने स्पष्ट कहा:

“अब अन्याय बर्दाश्त नहीं होगा।
नोटिस और दबाव से पत्रकारिता नहीं रुकेगी।
सिस्टम की गलती उजागर करना अपराध नहीं—यह जनता के प्रति जिम्मेदारी है।”

जल्द ही पत्रकार एक प्रतिनिधिमंडल बनाकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा जिले में बढ़ रहे विभागीय दमन पर रोक लगाने की मांग करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!