कुनकुरी। नगर में आयोजित भव्य रामकथा महोत्सव के सातवें एवं समापन दिवस पर पूजनीय संत चिन्मयानंद बापू ने श्रद्धालुओं को रामचरित के विभिन्न प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण एवं विस्तृत वर्णन सुनाया। कथा के दौरान उन्होंने अयोध्या कांड से लेकर उत्तरकांड तक की घटनाओं को मार्मिक शैली में प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।कथा में अयोध्या कांड का वर्णन करते हुए बापू जी ने बताया कि माता कैकेयी को राजा दशरथ द्वारा दिए गए दो वरदान ही आगे चलकर राम वनवास का कारण बने। उन्होंने कहा कि कैकेयी ने यह सब स्वार्थवश नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के गौरव और उनके अवतार के उद्देश्य की पूर्ति हेतु किया। उन्होंने स्वयं को दोषी ठहराकर भी राम को किसी प्रकार के कलंक से बचाने का प्रयास किया।

 


आगे कथा में निषादराज, केवट प्रसंग, जटायु मोक्ष तथा किष्किंधा कांड का सुंदर वर्णन किया गया। भगवान श्रीराम द्वारा सुग्रीव से मित्रता निभाने और बाली वध के माध्यम से धर्म स्थापना का संदेश दिया गया। सुंदरकांड में हनुमान जी का पराक्रम, माता सीता से भेंट एवं लंका दहन का प्रसंग अत्यंत भावपूर्ण रहा। बापू जी ने कहा कि सच्ची भक्ति से असंभव भी संभव हो जाता है।लंका कांड के प्रसंग में उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम और रावण के बीच लगभग 13 दिनों तक युद्ध चला, जिसमें अंततः अहंकार रूपी रावण का वध हुआ और सत्य की विजय हुई। इसके पश्चात प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन पर दीपावली का पर्व मनाया गया और आदर्श रामराज्य की स्थापना हुई, जहां धर्म, न्याय और सुख-शांति का वास था।
उत्तरकांड के वर्णन में उन्होंने बताया कि एक धोबी की टिप्पणी के कारण भगवान श्रीराम ने माता सीता का त्याग किया। माता सीता ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में निवास किया, जहां लव-कुश का जन्म हुआ। आगे अश्वमेध यज्ञ, लव-कुश द्वारा रामकथा गायन तथा कागभुशुंडी-गरुड़ संवाद का भी विस्तार से वर्णन किया गया।अपने प्रवचन में वर्तमान समय की परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए बापू जी ने आदिवासी क्षेत्रों में हो रहे धर्मांतरण पर चिंता व्यक्त की और सनातन धर्म की रक्षा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सेवा, श्रद्धा और संस्कार ही सनातन धर्म की मूल भावना है। साथ ही उन्होंने मांस, मदिरा एवं नशे से दूर रहने को ही सच्ची “दक्षिणा” बताया।उन्होंने श्रद्धालुओं को नियमित साधना का मार्ग बताते हुए प्रति मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार सुंदरकांड पाठ तथा प्रतिदिन हनुमान चालीसा के पाठ का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे जीवन के संकट, रोग एवं दोष दूर होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।बापू जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि राम अनंत हैं और उनकी कथा भी अनंत है। कलयुग में रामकथा का श्रवण, मनन और पालन ही जीवन को सफल बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है।समापन अवसर पर विधिवत पूर्णाहुति की गई। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या साय का विशेष सहयोग रहा। वे स्वयं श्रद्धालुओं के बीच बैठकर कथा का श्रवण करती रहीं। इस आयोजन से क्षेत्रवासियों को पूजनीय बापू जी का सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।इस भव्य के सफल आयोजन के लिए श्री राम कथा समिति एवं सर्व हिन्दू समाज की महत्वपूर्ण योगदान रहा ।

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