
तपकरा, जशपुर। विश्व हाथी दिवस के अवसर पर जशपुर जिले के तपकरा वन परिक्षेत्र में वन विभाग द्वारा जागरूकता एवं संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और आमजन को हाथियों के संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन तथा मानव-हाथी सह-अस्तित्व के प्रति जागरूक करना रहा। इस अवसर पर तपकरा वन परिक्षेत्र के वनकर्मी मौजूद रहे, वहीं आसपास के विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया।
*हाथी संरक्षण के महत्व की दी जानकारी*

संगोष्ठी के दौरान वनकर्मियों ने विद्यार्थियों को बताया कि हाथी जंगल के सबसे बड़े स्थलीय वन्यजीवों में शामिल होने के साथ-साथ वन पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाथियों की मौजूदगी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। हाथियों के संरक्षण से केवल एक वन्यजीव की रक्षा नहीं होती, बल्कि जंगल, जैव विविधता और कई अन्य वन्यजीवों का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है।
वनकर्मियों ने बच्चों को समझाया कि जंगलों में हाथियों के लिए पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आवास उपलब्ध रहना जरूरी है। जंगलों के लगातार प्रभावित होने से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर असर पड़ता है, जिसके कारण कई बार हाथियों का विचरण मानव बस्तियों और कृषि क्षेत्रों की ओर भी हो जाता है।
*हाथियों के व्यवहार और जीवनशैली की जानकारी*
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को हाथियों के रहन-सहन, भोजन, स्वभाव, व्यवहार, आवास और सामाजिक जीवन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वनकर्मियों ने बताया कि हाथी सामाजिक जीव हैं और सामान्यतः झुंड में रहते हैं। उनके व्यवहार को समझना मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि जंगल और वन्यजीवों के बीच प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है। हाथियों सहित सभी वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखना वन विभाग के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है।
*मानव-हाथी सह-अस्तित्व पर जोर*
संगोष्ठी में मानव और हाथियों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व बनाए रखने को लेकर भी चर्चा की गई। वनकर्मियों ने विद्यार्थियों को बताया कि वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को हाथियों की गतिविधियों के प्रति सतर्क और संवेदनशील रहना चाहिए। हाथियों के झुंड या अकेले हाथी की मौजूदगी की जानकारी मिलने पर वन विभाग को सूचना देना तथा वन विभाग द्वारा जारी सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।
बच्चों को समझाया गया कि वन्यजीवों के प्रति अनावश्यक छेड़छाड़ या उन्हें परेशान करने से स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना और उनके प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
*विद्यार्थियों ने पूछे सवाल*
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने हाथियों से संबंधित विभिन्न सवाल वनकर्मियों के सामने रखे। बच्चों ने हाथियों के भोजन, उनके झुंड में रहने, आवास, व्यवहार और जंगलों में उनकी भूमिका को लेकर अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त कीं। वनकर्मियों ने विद्यार्थियों के सवालों का जवाब देते हुए उन्हें वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
वनकर्मियों ने कहा कि बच्चों में प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति जागरूकता पैदा करना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। यदि नई पीढ़ी जंगल और वन्यजीवों के महत्व को समझेगी, तो पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।
जंगलों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि प्रकृति केवल मनुष्य के लिए नहीं है, बल्कि धरती पर मौजूद प्रत्येक जीव का इसमें महत्वपूर्ण स्थान है। जिस तरह मानव जीवन के लिए प्राकृतिक संसाधन और पर्यावरण जरूरी हैं, उसी तरह हाथियों और अन्य वन्यजीवों का सुरक्षित रहना भी पर्यावरणीय संतुलन के लिए आवश्यक है।
वनकर्मियों ने जंगलों की सुरक्षा, वन्यजीवों के संरक्षण और पर्यावरण को बचाने में आम लोगों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने की अपील की।
कार्यक्रम में तपकरा वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री प्रवीण कुमार वर्मा सहित तपकरा परिक्षेत्र के समस्त वन कर्मचारी उपस्थित रहे। संगोष्ठी के माध्यम से विद्यार्थियों को हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ जंगल और पर्यावरण की सुरक्षा का संदेश दिया गया।
















